सम्पादकीय

दुनिया में अधिकांश लोग भगवान को मानते हैं और कुछ ऐसे भी हैं, जो ईश्वर में आस्था नहीं रखते। कोई पिछले और अगले जन्म को मानता है, तो कोई नहीं मानता। कोई पाई-पाई को मोहताज है, तो कोई मौज से रह रहा है। कोई गरीब के घर जन्म लेकर भूखे ही रहता है तो कोई अमीर के घर पैदा होकर मौज-मस्ती में रहता है। यह माया (लीला) समझ नहीं आती। जो लोग पूर्व जन्म को नहीं मानते, उनके पास भी इसका जवाब नहीं है और जो पिछले जन्म में यकीन रखते हैं उनके पास भी नहीं। कोई सुखी है तो क्यों और कोई दुखी है तो क्यों?

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